सैनिटाइजर का उपयोग और उसके प्रभाव | Sanitizer ka upyog

आज आधे से ज्यादा देश कोरोना वायरस से लड़ रहे है जैसे की हम सभी लोग जानते है की यह बीमारी मुँह ,नाक,और हाथो को छूने से होती है लोग मुँह को तो मास्क से ढक लेते है लेकिन हाथो की सुरक्षा नहीं कर पाते है इसलिए आज हम आपको सैनिटाइजर का उपयोग करने के बारे में बताने जा रहे है हाथों को धोने के लिए साबुन की जगह हैंड सैनिटाइजर का उपयोग अधिक किया जा रहा है। हैंड सैनिटाइजर कीटाणुओं और बैक्टीरिया को हमारे हाथों से निकाल देता है, साथ ही इसके इस्तेमाल के बाद हाथों से भीनी सी महक भी आती है, लेकिन कुछ लोगों को बार-बार हाथ धोने की आदत सी होती है। ऐसे लोगों को हर छोटे-बड़े काम में हाथ डालने के बाद लगता है कि उनके हाथ सिर्फ पानी से साफ नहीं हो पाएंगे, इसलिए वे बार-बार हाथ साफ करने के लिए हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग करते हैं।

वैसे तो हमने आपको बताया है की आज फिलहाल हर किसी को कोरोना वायरस का खतरा है। ऐसे में हाथ साफ रखना बेहद जरूरी है। डॉक्‍टर्स ने सलाह दी है की हमको 15-20 सेकेंड तक साबुन से हाथ धोना चाहिए। मगर सैनिटाइजर का यूज खूब हो रहा है। इससे हाथ को डिसइंफेक्‍ट करना आसान तो हो जाता है मगर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, लोगों को अल्‍कोहल-बेस्‍ड हैंड सैनिटाइजर यूज करने चाहिए। इनमें कम से कम 60% अल्‍कोहल होना चाहिए।

यदि आपके हाथ ज्यादा गंदे है तो पहले साबुन से अच्छे से हाथ धो ले उसके बाद आप सैनिटाइजर का यूज करे ज्यादा गंदे हाथो में सैनिटाइजर का यूज नहीं करना चाहिए।

सैनिटाइजर के नुकसान या प्रभाव

जिन सैनिटाइजर में खुशबू के लिए फैथलेट्स नामक रसायन का इस्तेमाल किया जाता है, जिस सैनिटाइजर में इसकी मात्रा ज़्यादा होती है, वे हमारे लिए हानिकारक होते हैं। इस तरह के अत्यधिक खुशबू वाले सैनिटाइजर लीवर, किडनी, फेफड़े तथा प्रजनन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। साथ ही इसका असर पेड़-पौधो व जानवरो पर भी पड़ता है

जैसा की हमने आपको बता दिया है की सैनिटाइजर में अल्कोहल की मात्रा पायी जाती है और अल्कोहल होने की वजह से इसका बच्चों की सेहत पर बुरा असर हो सकते हैं यदि बच्चे गलती से इसको पी जाये तो यह हानिकारक हो सकता है।

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