पुदीने के सेवन के फायदे | Pudina ke sevan ke fayde

पुदीना स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक माना जाता है।क्योंकि अनेक औषधीय गुणों से भरा पुदीना बाजार में आसानी से उपलब्ध भी है और महंगा भी नहीं होता है। गुण तो इसमें इतने हैं कि इससे न सिर्फ रोग दूर रहते हैं, बल्कि त्वचा की देखभाल में भी काफी मदद मिलती है।

पुदीने को पानी में उबालकर थोड़ी चीनी मिलाकर उसे गर्म-गर्म चाय की तरह पीने से बुखार दूर होकर बुखार के कारण आई निर्बलता भी दूर होती है।धनिया, सौंफ व जीरा समभाग में लेकर उसे भिगोकर पीस लें। फिर 150 ग्राम पानी मिलाकर छान लें। इसमें पुदीने का अर्क मिलाकर पीने से उल्टी का शमन होता है।पुदीना लीवर के लिए काफी फायदेमंद होता है। इस बारे में कम लोगों को ही जानकारी होती है, लेकिन यही सच है कि पुदीने में मौजूद पोषक तत्वों के कारण लीवर बेहतरीन तरीके से काम करता है, इसलिए पुदीने का सेवन नियमित रूप से किया जाना चाहिए।

गर्मी में लू से बचने के लिए भी पुदीने का इस्तेमाल किया जाता है. इसके रस को पीकर बाहर निकलने से धूप लगने का डर भी कम रहता है.हैजा होने पर भी पुदीने का इस्तेमाल किया जाता है. हैजा होने पर पुदीना, प्याज का रस, नींबू का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से फायदा होगा.

अगर आपके मुंह से बदबू आती है तो पुदीने की कुद पत्त‍ियों को चबा लें. निय‍म से इसके पानी से कुल्ल करने पर भी बदबू चली जाएगी इसके अलावा बहुत से टूथपेस्ट में भी पुदीने की पत्तियों का काफी इस्तेमाल होता है, क्योंकि यह ताजगी देती है। पुदीना मुंह में बैक्टेरिया को पूरी तरह से खत्म करने के अलावा दांतों और जीभ की गंदगी को भी दूर करता है, जिसके कारण सांसों में भी ताजगी बनी रहती है।पुदीने के औषधीय गुण फेफड़ों में जमे बलगम, यानी कफ़ को शरीर से बाहर करने में बहुत मददगार होते हैं, इसलिए सांसों में ताजगी लाने के लिए मिंट के कई प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया जाता है। पुदीने को सुखा कर, कूट कर, कपड़े से छान कर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण का एक चम्मच दिन में दो बार सादे पानी के साथ लेने से सांसों से संबंधित परेशानियों से राहत मिलती है।

पुदीने और सौंठ का क्वाथ बनाकर पीने से सर्दी के कारण होने वाले बुखार में राहत मिलती है। पुदीने की ताजी पत्त‍ियों को पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे को ठंडक मिलती है.पेट दर्द होने पर भी पुदीने को जीरा, काली मिर्च और हींग के साथ मिलाकर खाने से आराम होता है.

दही खाने के फायदे | Dahi khane ke fayde

दही का प्रयोग हर घर में होता है। लेकिन क्या आपको पता है दही में कई प्रकार के पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं जिनको खाने से शरीर को फायदा होता है। दही में कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन पाया जाता है। दूध के मुकाबले दही सेहत के लिए ज्यादा फायदा करता है। दही में दूध की अपेक्षा ज्यादा मात्रा में कैल्शियम होता है। इसके अलावा दही में प्रोटीन, लैक्टोज, आयरन, फास्फोरस पाया जाता है।दही आपके शरीर के लिए कितना फायदेमंद है।

दही भारतीय थाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. थाली में दही होने का मतलब है कि आपकी थाली स्वादिष्ट होने के साथ ही पौष्ट‍िक भी है.दही में मौजूद तत्व शरीर को कई तरीके से फायदा पहुंचाते हैं.ये प्रो-बायोटिक फूड कैल्शियम से भरपूर होता है.कैल्शियम की उपस्थिति दांत और हड्डियों को मजबूती देने का काम करती है.

लू से बचने के लिए दही का प्रयोग किया जाता है। लू लगने पर दही पीना चाहिए।दही पीने से पाचन क्षमता बढती है और भूख भी अच्छे से लगती है।सर्दी और खांसी के कारण सांस की नली में इन्फेक्शन हो जाता है।इस इंफेक्शन से बचने के लिए दही का प्रयोग करना चाहिए।

दही पचाना हमारे लिए बहुत आसान होता है यदि आपने बहुत तीखा, मसालेदार और तला हुआ भोजन खाया है और उसके बाद आप दही का सेवन करते हैं तो वह भोजन आपको तकलीफ नहीं देता और उसे आसानी से पचाने में भी मदद मिलती है यह हमारे पेट के लिए बहुत फायदेमंद है और अगर आप इसमे अजवाइन मिलाकर इसकी छाछ बना कर पीते हैं तो यह आपको कब्ज से राहत दिलाने के लिए बहुत उपयोगी है इसमें मौजूद अच्छे
बैक्टीरिया, हमारी आंतों की गतिविधि को बढ़ावा देते हैं जिससे कब्ज की समस्या को कम करने के साथ-साथ यह हमारी पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाता है

दही दांत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. इसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम और फॉस्फोरस उपस्थित होता है. ये हड्ड‍ियों की मजबूती के लिए भी बहुत फायदेमंद है. ये ऑस्ट‍ियोपोरोसिस और गठिया में राहत देने का काम करता है.मुंह के छालों के लिए यह बहुत ही अच्छा घरेलू नुस्खा है।मुंह में छाले होने पर दही से कुल्ला करने पर छाले समाप्त हो जाते हैं।

यदि आप दही का सेवन करते हैं तो आपको खूब एनर्जी तुरंत प्राप्त होती है साथ ही दिनभर की भागदौड़ की वजह से होने वाली थकान भी मिट जाती है दही या छाछ का सेवन करने का सीधा संबंध हमारे मस्तिष्क से है दही का सेवन करने वालों में तनाव की शिकायत कम रहती है गर्मियों में त्वचा पर सनबर्न होने के बाद दही से मलना चाहिए इससे सनबर्न और टैन से फायदा मिलता है।

ब्लैक टी के फायदे | black tea ke fayde

दुनिया भर में चाय का शौक रखने वालें की कमी नहीं है। चाय के अलग-अलग स्वाद और प्रकार अपने-अपने फायदे के लिए जाने जाते हैं।आज कल ज्यादा लोग दूध वाली चाय पीते है .जिसकी वजह से लोगो का फैट बढ़ जाता है फैट कम करने के लिए लोग ग्रीन टी का उपयोग करते है.वही ब्लैक टी भी फैट कम करने में मदद करती है.

इस चाय में दूध और चीनी नहीं होती है इसलिए मधुमेह के रोगी इसे बिना डरे पी सकते हैं। रोजाना ब्लैक टी के सेवन से डायबिटीज यानि मधुमेह होने की संभावना कम हो जाती है। इसके सेवन से ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम से जुड़े तमाम रोग तथा मधुमेह का भी खतरा बेहद कम हो जाता है।

काली चाय को रोजाना अपनी डाइट में शामिल कर आप प्रोस्टेट, ओवेरियन और फेफड़ों के कैंसर से बच सकते हैं।काली चाय का प्रयोग शरीर में कैंसर कोशि‍काओं को खत्म करने में मदद करता है। यह महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की संभावना को रोकती है साथ ही मुंह के कैंसर से भी बचाने में मदद करती है।ब्लैट टी पीने से कैंसर होने की आशंका बहुत कम हो जाती है. रोजाना एक कप ब्लैक टी कैंसर से बचाव में मददगार है.

ब्लैक टी में पाये जाने वाले तत्वों के कारण यह हड्डियों को मजबूत बनाती है। हड्डियों को मजबूत बनाने और अर्थराइटिस के खतरे को कम करने में ब्लैक टी काफी मदद करती है। इससे बोन डेंसिटी, ऑस्टियोपोरोसिस, और फ्रैक्चर का खतरा कम करने के लिए काफी मदद मिलती है।

दिमाग की कोशि‍काओं को स्वस्थ रखने के साथ ही उनमें रक्त के प्रवाह को और भी बेहतर बनाने के लिए काली चाय पीना बहुत उपयोगी है। दिन में लगभग 3 कप काली चाय का सेवन तनाव को कम करने में सहायक है यह दिमाग को तेज की आप की याददाश्त को बढ़ाती है और आप पहले से अधि‍क सतर्क व सक्रिय होते हैं।इसे पीने से आप अधि‍क ऊर्जा महसूस करते हैं और सक्रिय भी रहते हैं। काली चाय में मौजूद कैफीन, कॉफी या कोला के मुकाबले अधि‍क फायदेमंद होता है और आपके मस्तिष्क को सतर्क रखता है जिससे आपके शरीर में ऊर्जा का संचार निरंतर होता रहता है।

ब्लैक टी दांतो में प्लॉक का बनना रोकती है। साथ ही ब्लैक टी का सेवन बैक्टीरिया के विकास को रोकता है। ये बैक्टीरिया कैविटी और दांतों के सड़ने का कारण बनते हैं। ब्लैक टी में फ्लोराइड भरपूर मात्रा में होता है जो मुँह की दुर्गन्ध को दूर करता है और मुँह को नुकसानदायक जीवाणुओं से बचाता है|

ग्रीन टी के फायदे | Green tea ke fayde

ग्रीन टी में पॉलीफेनॉल्स भरपूर मात्रा में होता है. पॉलीफेनॉल्स असल में एंटी-ऑक्सीडेंट व एंटी फ्लेमेटरी होते हैं, जो डायबिटीज के मरीजों में दिल के रोगों के खतरे को कम करने में मददगार है. ग्रीन टी उन लोगों के लिए बहुत बढ़िया है जो डायबिटीज से जूझ रहे हैं, क्योंकि डायबिटीज मेटाबॉलिक सिस्टम को बेहतर बनाती है.

इसके रोजाना पीने से शरीर में वास कम होता है और पेट की चर्बी घटती है।यह मोटापा और मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है और साथ ही कैंसर जैसी घातक बीमारी के जोखिम से बचाव में भी कुछ हद तक सहायक हो सकती है ग्रीन टी में मौजूद कैटेशिन इंसुलिन के प्रभाव को कम करता है. यह कार्बस के प्रभाव को कम कर सकता है.

ग्रीन टी आपकी त्वचा में जान डालने के लिए भी बहुत अच्छा विकल्प है. ग्रीन टी में चीनी मिलाकर इसका प्रयोग चेहरे की मृत कोशिकाओं को हटाने के लिए फेस स्क्रब के रूप में भी कर सकते हैं. ग्रीन टी एक बेहतरीन टोनर है, जो कि बंद पड़े रोम छिद्रों को खोलने में मदद करती है. इसके साथ ही साथ इसे बालों को साफ करने और उन्हें स्वस्थ रखने में भी प्रयोग किया जा सकता है.

ग्रीन टी का सेवन मस्तिष्क के लिए भी लाभकारी हो सकता है।ग्रीन टी चिंता को कम करने के साथ-साथ मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में सुधार कर सकती है।यह एकाग्रता बढ़ाने में भी सकारात्मक प्रभाव प्रदर्शित कर सकती है।इन सभी लाभ के पीछे ग्रीन में मौजूद कैफीन और एल-थीनाइन का संयुक्त प्रभाव हो सकता है।ऐसे में संतुलित मात्रा में इसका सेवन किया जा सकता है।

ग्रीन टी पीने का सही समय और नुकसान :

i. खाली पेट कभी भी ग्रीन टी न पिएं.
ii. खाना खाने से एक या दो घंटे पहले ही ग्रीन टी पी लें.
iii. खाने के तुरंत बाद ग्रीन टी पीना खतरनाक हो सकता है.
iv. एक दिन में दो या तीन कप ये ज्यादा ग्रीन टी पीना खतरनाक हो सकता है.
v. ग्रीन टी के सेवन से पेट दर्द, मतली और लिवर संबंधी समस्या हो सकती है।

तुलसी की चाय पीने के फायदे | Tulsi ki chai pine ke Fayde

तुलसी, सैंकड़ों सालों से आयुर्वेदिक दवाइयों का भी अहम हिस्सा रही है। लेकिन आज हम तुलसी के पत्तों की नहीं बल्कि तुलसी की चाय पीने के कितने फायदे हैं इस बारे में आपको बताएंगे। अगर आप टी लवर हैं, चाय के शौकीन हैं तो आप दूध वाली कैफीन से भरपूर चाय पीने की जगह तुलसी वाली चाय का ऑप्शन ट्राई कर सकते हैं।

सुबह खाली पेट तुलसी का पत्ता चबाना सबसे लाभकारी होता है। इससे आपकी इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होती है और आप बीमारियों से बचे रहते हैं। लेकिन अगर आप तुलसी का पत्ता चबाकर नहीं खा सकते तो उसकी चाय पी लें। सुबह-सुबह दूध वाली चाय की जगह तुलसी की चाय पी सकते हैं। तुलसी के पत्तों में ऐंटिऑक्सिडेंट्स होता है जो शरीर को फ्री-रैडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाकर रखता है। साथ ही तुलसी की चाय सूजन को कम करने और तनाव दूर करने में भी मदद करती है।

सांस संबंधी समस्याओं में आराम : तुलसी की चाय कफ, खांसी, जुकाम, अस्थमा या ब्रोनकाईटिस से राहत दिलाती है। इसमें इम्यूनोमॉड्यूलेटरी एंटीट्यूसिव और एक्सपेक्टोरेंट होते हैं जो कफ व बलगम से छुटकारा दिलाते हैं। इसमें खास ऑयल भी होते हैं जो जकड़न में भी आराम पहुंचाते हैं।

नियमित रूप से रोजाना अगर तुलसी की चाय का सेवन किया जाए तो इससे आपका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। लेकिन अगर आप डायबीटीज के मरीज हैं तो तुलसी की चाय में शहद का इस्तेमाल न करें। इसके अलावा तुलसी की चाय पीने से शरीर में कार्बोहाइड्रेट और फैट का मेटाबॉलिज्म सही रहता है जिससे खून में मौजूद शुगर आपको एनर्जी देने का काम करता है।

तुलसी में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं जो दांतों व मुंह के कीटाणुओं से लड़ते हैं और इनकी बीमारियों से रक्षा करते हैं। तुलसी की चाय माउथ फ्रेशनर का भी काम करती है और सांस की बदबू को दूर करती है। यह मुंह को अल्सर या जख्म से भी बचाती है।

तुलसी की चाय बनाने की विधि

इसे बनाना बहुत ही आसान है, इसके लिए आपको सिर्फ एक कप पानी डालकर उसमें 2-4 तुलसी की पत्ती डालना है। अब इसे गैस पर चढ़ाकर उबाल लें। इससे तुलसी का रंग और फ्लेवर दोनों पानी में आ जाएगा। अब आपकी तुलसी की चाय तैयार है।

नोट : अगर आप तुलसी की चाय को मीठा करना चाहें तो पानी उबालते समय ही अपने स्वाद के अनुसार शकर डाल दें और गरम होने के लिए रख दें, क्योंकि इस चाय में दूध का उपयोग नहीं किया जाता है।

होंठों के कालेपन को दूर करने के घरेलू उपाय | Hatho ke kalepan ko dur karne ke ghareloo upay

गुलाबी होंठ किसी भी महिला की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं. कुछ महिलाएं तो लिपस्टिक लगाकर अपने होंठो का कालापन छिप लेती हैं लेकिन उनका क्‍या जिन्हें लिपस्टि‍क लगाना पसंद न हो या फिर अगर आप बिना लिपिस्‍टक लगाए नैचुरल लुक में रहना चाहें तो यह कैसे मुमकिन हो सकता है.सबसे पहले आपको ये जानने की जरूरत है कि आखिर होंठ काले कैसे हो जाते हैं. कई बार सूरज की रोशनी के सीधे संपर्क में होने की वजह से, किसी तरह की एलर्जी होने से, सस्ती क्वालिटी के कॉस्मेटिक के इस्तेमाल से, तंबाकू खाने से, बहुत अधिक सिगरेट पीने से या फिर कैफीन की बहुत ज्यादा मात्रा का सेवन करने से होंठ काले हो जाते हैं. कई बार ये हॉर्मोनल इम्बैलेंस की वजह से भी हो सकता है.वैसे तो बाजार में ऐसे कई उपाय मौजूद हैं जिनसे काले होंठों का रंग ठीक किया जा सकता है लेकिन कुछ घरेलू उपाय भी हैं, जो आपकी मदद कर सकते हैं. अच्छी बात यह है कि इनके इस्तेमाल से किसी प्रकार के साइडइफेक्ट का खतरा भी नहीं रहता है.

बादाम आपके दिमाग के साथ-साथ होंठों को भी तंदरुस्त रखता है। बादाम खाने से होंठ नरम और गुलाबी बने रहते हैं।रात में डिनर के साथ चकुंदर को सलाद की तरह लें इससे होठ नरम रहेंगे। चकुंदर होठों में विटामिन की कमी को पूरा करता है।मौसंबी या नींबू का रस भी होठों के लिए बहुत अच्छा होता है। अधिक से अधिक नींबू पानी पीने और मौसंबी का जूस पीने से होंठ जानदार बने रहते हैं।नींबू का इस्तेमाल अक्सर काले घेरों को दूर करने के लिए किया जाता है. आप इसका इस्तेमाल होंठों के कालेपन को दूर करने के लिए भी कर सकती हैं. नींबू के ब्लीचिंग गुण होंठों के गहरी हो रही रंगत को कम करने में बहुत कारगर होते हैं. अच्छा रहेगा, अगर आप नींबू की कुछ बूंदों को अपने होंठों पर लगाकर सो जाएं. एक-दो महीने तक यह ऐसा करते रहने से होंठों का कालापन दूर हो जाएगा.

गुलाब में तीन खास औषधीय गुण पाए जाते हैं. ये राहत देने, ठंडक देने और मॉइश्चराइज करने का काम करता है. गुलाब की पंखुडि़यां होंठों के कालेपन को दूर करके उन्हें गुलाबी बनाती हैं. गुलाब जल की कुछ बूंदों को शहद में मिलाकर होंठों पर लगाने से फायदा होता है.क्रीम से अधिकतर लड़कियां दूर रहती हैं लेकिन आपको बता दें कि फ्रेश क्रीम खाने से होंठ भी क्रीम की तरह नरम रहते हैं।टमाटर खाना भी आपके होंठों के लिए बहुत जरूरी है। कच्चे टमाटर को सलाद की तरह खाने के साथ जरूर लें। ये होंठों में एक अलग जान डालते हैं।

होंठों की देखभाल के लिए अनार से बढ़कर कुछ भी नहीं. ये होंठों को पोषित करने के साथ ही मॉइश्चराइज करने का काम भी करता है. होंठों की नमी लौटाने के साथ ही अनार उन्हें नेचुरली गुलाबी भी करता है. अनार के कुछ दानों को पीस कर उसमें थोड़ा सा दूध और गुलाब जल मिला लें. इस पेस्ट को होंठों पर हल्के हाथ से मलने पर जल्दी फायदा होता है.

सर्दी-खांसी और जुकाम के घरेलू उपाय | Sardee-khaansee aur jukaam ke ghareloo upaay

खांसी-जुकाम हर बदलते मौसम के साथ आने वाली समस्या है।खांसी बैक्टीरियल या वायरल इन्फेक्शन, ऐलर्जी, साइनस इन्फेक्शन या ठंड के कारण हो सकती है लेकिन हमारे देश में हर परेशानी के लिए लोग डॉक्टरों के पास नहीं जाते। हमारी ही किचन में कई ऐसे घरेलु नुस्खे छिपे होते हैं जिनसे खांसी-जुकाम जैसी छोटी-मोटी बीमारियां फुर्र हो जाती हैं।खांसी जितनी कॉमन समस्या है, उतने ही सरल है इसके इलाज। बस शर्त यह है कि आपको घर में रखी चीजों की सही-सही जानकारी होनी चाहिए। ताकि कोई भी घरेलू नुस्खा आप पर उल्टा ना पड़ जाए।

बचपन में सर्दियों में नानी-दादी घर के बच्चों को सर्दी के मौसम में रोज हल्दी वाला दूध पीने के लिए देती थी। हल्दी वाला दूध जुकाम में काफी फायदेमंद होता है क्योंकि हल्दी में एंटीआॅक्सीडेंट्स होते हैं जो कीटाणुओं से हमारी रक्षा करते हैं। रात को सोने से पहले इसे पीने से तेजी से आराम पहुचता है. हल्दी में एंटी बैक्टीरियल और एंटी वायरल प्रॉपर्टीज मौजूद रहती है जो की इन्फेक्शन से लडती है. इसकी एंटी इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज सर्दी, खांसी और जुकाम के लक्षणों में आराम पहुंचाती है.

शहद के साथ गर्म चाय बलगम को ढीला करने, गले को शांत करने और जलन को कम करने में मदद कर सकती है। कैफीन रहित चाय जैसे हर्बल चाय में दो चम्मच शहद मिलाएं। इस चाय को सोने से पहले पिएं। लेकिन खास बात ध्यान रखें कि एक साल से छोटे बच्चों को शहद न दें।

आंवला खांसी के लिए काफी असरकारी माना जाता है. आंवला में विटामिन-सी होता है, जो ब्लड सरकुलेश को बेहतर बनाता है. अपने खाने में आंवला शामिल कर आप एंटी-ऑक्सीडेंट्स का सोर्स बढ़ा सकते हैं. यह आपकी इम्यूनिटी को मजबूत करेगा.

आंवला में प्रचुर मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता है जो खून के संचार को बेहतर करता है और इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स भी होते हैं जो आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा करता है। अदरक के रस में तुलसी मिलाएं और इसका सेवन करें। इसमें शहद भी मिलाया जा सकता है। अलसी के बीजों को मोटा होने तक उबालें और उसमें नीबू का रस और शहद भी मिलाएं और इसका सेवन करें। जुकाम और खांसी से आराम मिलेगा।

खांसी आमतौर पर दो तरह की होती हैं। एक सूखी खांसी और दूसरी गीली खांसी। सूखी खांसी में धसका-सा लगता है और गले में अधिक दिक्कत होती है साथ ही आवाज भी अधिक होती है। जबकि गीली खांसी में खांसी के साथ कफ निकलने की समस्या भी होती है और आमतौर पर पसलियों में दर्द होता है।धूम्रपान करने से गंभीर खांसी हो सकती है। धूम्रपान नहीं करने से रात भर समस्या नहीं रहेगी, यह धीरे-धीरे खांसी को कम करने में मदद करेगा। जब धूम्रपान बंद करेंगे, तो न केवल खांसी में सुधार होगा, बल्कि समग्र स्वास्थ्य में भी सुधार होगा।

सूखी हवा आपके गले और वायुमार्ग को परेशान कर सकती है और खांसी को बदतर बना सकती है। हवा में नमी लाने के लिए रात में ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें। यह गले को शांत करने और खांसी को रोकने में मदद कर सकता है।अगर आपको गीली खांसी है यानी ऐसी खांसी जिसमें खांसते वक्त कफ भी निकल रहा हो तो इस खांसी के इलाज के लिए आपको हल्दी वाला दूध नहीं पीना चाहिए। क्योंकि दूध से कफ बढ़ने की समस्या हो सकती है।

अगर आपको सूखी खांसी है तो आपको इससे मुक्ति पाने के लिए हल्दी मिला दूध पीना चाहिए। यह आपकी खांसी को शीघ्र ठीक करने का काम करेगा। साथ ही खांसी के कारण होने वाली वीकनेस और मसल्स पेन में राहत देता है।

कान दर्द के घरेलू उपाय | kaan dard ke ghareloo upaay

कान हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, कान में वैक्स जमा होना, सर्दी के कारण दर्द होना या फिर किसी प्रकार की एलर्जी हो जाना या इंफेक्शन होना आम समस्या है, जो कई लोगों के साथ होती है।लेकिन समय पर इलाज न होने पर यह समस्या बढ़ जाती है। इससे निपटने के लिए लहसुन एक बेहतरीन उपाय है।

जिसे नियमित अंतराल के दौरान साफ करना बहुत जरूरी हैं। दरअसल, कान के पास अलग से सुरक्षा परत नहीं होती जिससे धूल-मिट्टी के रूप में छोटे-छोटे कण और वेक्स हमारे कान के अंदर जमा हो जाती है। जो कान में बैक्टीरियल इन्फेक्शन का कारण बन सकते हैं। इसके अतिरिक्त सर्दी और बरसात के दिनों में कान संबंधी रोग आम सुनने को मिलते हैं। सर्दी, कर्कश ध्वनि,चोट, कान में कीट के घुसने या संक्रमण, अधिक मैल जम जाने या नहाते समय कान में पानी आदि चला जाने से भी कान में इन्फेक्शन हो जाती है। यह पीड़ा असहनीय होती हैं की बर्दाश्त से बाहर हो जाती हैं।कई बार तो कान की वजह से चक्कर, भारी सिरदर्द और बुखार की परेशानी भी हो जाती है।

कानों से मैल साफ करने का एक सबसे अच्छा् तरीका है कि नहाने के बाद कान साफ़ करें क्योंकि नहाने के बाद वैक्स नर्म हो जाता है। आप घर में ऐसी कई नैचुरल चीजें तैयार कर सकते हैं जो वैक्स को नर्म बनाता है।ग्लिसरीन और मिनरल आयल एक एक चम्मच लें और घोल तैयार करें। अब दो-तीन बूंद कान में डाल कर रात भर छोड़ दें। सुबह इयर बड से कान को अच्छे से साफ कर लें।हाइड्रोजन पैराऑक्साइड और पानी की बराबर मात्रा लेकर घोल बनाएं। अब इसकी कुछ बूंद कानों में डालें और कान में अच्छी तरह से चली जाने दें। उसके बाद कान को पलटें और बाकी का बचा घोल बाहर निकाल दें।

कुछ लहसुन की कलियों को लेकर पीस लें या फिर कुचल लें। अब इस मिश्रण को एक कपड़े में लपेटकर कान पर रखें। लगभग आधा घंटा इस कपड़े को कान पर रखे रहने दें, फिर हटा लें। कुछ समय बाद आप महसूस करेंगे की आपके कान का दर्द गायब हो चुका है।

सरसों के तेल में लहसुन की कुछ कलियां डालकर गर्म करें। जब यह तेल गुनगुना रह जाए तो इसकी एक या दो बूंद कान में डालें और रुई लगा लें। ध्यान रहे कि यह तेल गरम न हो, वरना यह आपके कान के परदे को नुकसान पहुंचा सकता है।अगर आपको कान दर्द है और सहन कर पाना मुश्क‍िल है तो ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल आपको तुरंत राहत देगा. ऑलिव आयल को हल्का गर्म कर लें. इसकी दो से तीन बूंद कान में डालें या फिर कॉटन बड की मदद से तेल को कान में लगा लें.

प्याज एक ऐसी चीज है जो लगभग सभी घरों में आसानी से मिल जाती है. इसका एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण कान दर्द में आराम देता है. प्याज के रस को हल्का गर्म कर लीजिए. इस रस के इस्तेमाल से राहत मिलेगी.इन दोनों में ही एंटी-बैक्टीरियल गुण पाया जाता है. कान दर्द होने पर इन दोनों पत्त‍ियों का इस्तेमाल बहुत कारगर होता है. इन दोनों को ही इस्तेमाल करने का तरीका एक ही है. कुछ पत्त‍ियों को हाथ से मलकर उनका रस निकाल लें. इसकी एक या दो बूंद कान में डालने से फायदा होगा.

जोड़ो के दर्द का उपाय | jodo ke dard ka upaay

पुराने समय में उम्र बढ़ने के साथ−साथ व्यक्ति को जोडों में दर्द की परेशानी होती थी, लेकिन आज के समय में यह समस्या कम उम्र में ही तकलीफ देने लगती हैं और इसके पीछे मुख्य कारण है व्यक्ति का गलत लाइफस्टाइल। वैसे तो लोग जोड़ों के दर्द से निजात पाने के लिए दवाइयों का सेवन करते हैं जोड़ दर्द होने की वजह गलत खान पान ही है। हड्डियों में मिनरल्स की कमी और बढ़ती उम्र भी इसकी एक वजह से हो सकती है।

मांसपेशियों व जोड़ों के दर्द से निजात पाने के लिए सेंधा नमक से नहाना एक बेहद पुराना नुस्खा है। मैग्नीशियम और सल्फेट में समृद्ध सेंधा नमक आसानी से स्किन के अब्जार्ब हो जाते हैं, जिससे आपको सूजन, मांसपेशियों की ऐंठन व दर्द से निजात मिलती है। जोड़ों के दर्द से निजात पाने के लिए बाथटब में गुनगुना पानी डालकर उसमें दो कप सेंधा नमक डालें और करीबन 20 मिनट के लिए इस पानी में बैठें। इससे आपको तुरंत जोड़ों के दर्द से निजात मिलेगी।

अमरूद की 4-5 कोमल पत्तियों को पीसकर उसमें थोड़ा सा काला नमक मिलाकर रोजाना खाएं। इससे दर्द से राहत मिलेगी।काली मिर्च को तिल के तेल में जलने तक गर्म करें और ठंडा होने पर उसी तेल से जोड़ों की मालिश करें।गाजर को पीसकर इसमें थोड़ा सा नींबू का रस मिलाकर रोजाना सेवन करें।दर्द वाले स्थान पर अरंडी का तेल लगाकर, उबाले हुए बेल के पत्तों को गर्म गर्म बांधे इससे भी तुरंत राहत मिलेगी। 2 चम्मच बड़े शहद और 1 छोटा चम्मच दालचीनी पाऊडर सुबह शाम एक गिलास गुनगुने पानी से लें।सुबह के समय सूर्य नमस्कार और प्राणायाम करने से भी जोड़ों के दर्द से छुटकारा मिलता है।1 चम्मच मेथी के बीच रातभर पानी में भिगोकर रखें। सुबह पानी निकाल दें और मेथी के बीजों को अच्छे से चबाकर खाएं। गठिए के रोगी 4-6 लीटर पानी पीने की आदत डाल लें। इससे मूत्रद्धार के जरिए यूरिक एसिड बाहर निकलता रहेंगा।

ध्यान रखेंः कोई भी नुस्खा अपनाने से पहले डॉक्टरी सलाह अवश्य लें।

पीठ के निचले हिस्से व गठिया के दर्द से निजात दिलाने में हीट एंड कोल्ड पैक का इस्तेमाल बेहद प्रभावकारी होता है। जहां हीट मसल्स को रिलैक्स करते हैं और स्टिफनेस दूर होती है। इसके लिए आप गर्म पानी की बोतल व हीट पैड का प्रयोग करें।वहीं कोल्ड पैक के लिए आप बर्फ का प्रयोग करें। इसके लिए आप कपड़े में बर्फ लपेंटे और प्रभावित स्थान पर रखें। इससे दर्द व सूजन में आराम मिलेगा।

घुटने व जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए मसाज करना एक अच्छा उपाय है। आप घुटने की मालिश करने के लिए एसेंशियल ऑयल का सहारा ले सकते हैं। यह एसेंशियल ऑयल घुटने की स्टिफनेस को रिलीज करके दर्द को कम करने में सहायक होते हैं।

हल्दी के औषधीय गुण किसी से छिपे नहीं है। चोट लगने से लेकर किसी भी तरह के दर्द में राहत पाने के लिए हल्दी के सेवन की सलाह दी जाती है। दरअसल, हल्दी में कर्क्यूमिन नामक एक पावरफुल एंटी−इंफलेमेटरी तत्व पाया जाता है। यह कंपाउंड जोड़ों के दर्द और सूजन के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। बस आप एक गिलास पानी में अदरक और हल्दी डालकर 12−15 मिनट तक उबालें। इस मिश्रण को रोजाना पिएं।

सिर दर्द के घरेलू उपाय | sir dard ke ghareloo upaay

बाजार में कई तरह की दवाइयां मौजूद हैं जो सिर दर्द में राहत के लिए ली जाती हैं लेकिन हर बार दवाई लेना भी सही नहीं है. पर आप चाहें तो ऐसे कई घरेलू उपाय हैं जिनसे आप अपना सिर दर्द चुटकी में दूर कर सकते हैं.अधिकांश मामलों में थकान और चिंता के कारण सिर दर्द होता है।सिर दर्द होने पर किसी काम में मन नहीं लगता है और जिंदगी थम-सी जाती है।

सालों से लोग सिर दर्द में राहत के लिए एक्यूप्रेशर का प्रयोग करते आ रहे हैं. सिर दर्द होने की स्थिति में आप अपनी दोनों हथेलियों को सामने ले आइए. इसके बाद एक हाथ से दूसरे हाथ के अंगूठे और इंडेक्स फिंगर के बीच की जगह पर हल्के हाथ से मसाज कीजिए. ये प्रक्रिया दोनों हाथों में दो से चार मिनट तक दोहराइए. ऐसा करने से आपको सिर दर्द में आराम मिलेगा.

सबसे आसान है नींबू और गुनगुने पानी का उपयोग। कई बार पेट में गैस बढ़ने के कारण सिर दर्द होता है। ऐसे में एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलकर सेवन किया जाए तो तुरंत फायदा होता है। इसमें थोड़ा शहद मिलाया जा सकता है। इसका सेवन रोज सुबह खाली पेट किया जाए तो स्थायी फायदा होता है। पेट शांत रहेगा और सिर दर्द भी नहीं होगा।

यह सबसे सामान्य रूप से होने वाला सिरदर्द है। इस तरह के सिरदर्द में व्यक्ति अपने सिर के दोनों तरफ़ तेज़ दर्द महसूस करता है, जैसे कोई दोनों ओर से सिर में रबर बैंड से दबा रहा हो। ऐसे सिरदर्द की वजह से गर्दन व कंधे की मांसपेशियां काफ़ी कड़ी हो जाती हैं और सूजन महसूस होती है।तनाव संबंधी सिरदर्द ठंडी हवा के संपर्क में आने से भी हो सकता है। जब सर्दी आती है और ठंडी हवा चलती है या एयर-कंडीशन के संपर्क में आने से जब हवा आपके गर्दन और सिर पर लगती है, इस स्थिति में भी यह सिरदर्द हो सकता है। टेंशन से होने वाले सिरदर्द में फिज़ियोथेरेपी काफ़ी लाभदायक हो सकती है

इस तरह का सिरदर्द काफ़ी तीव्र और पीड़ादायक होता है। क्लस्टर सिरदर्द एक दिन में कई बार हो सकता है, लेकिन ज़्यादा देर के लिए नहीं होता है। कभी-कभी यह किसी एक वक़्त पर ही शुरू होता है, जैसे – अगर यह सुबह शुरू हुआ, तो कुछ वक़्त तक रोज़ सुबह ही होगा। यह दर्द सिर के किसी एक साइड और एक आख में हो सकता है, क्योंकि यह चेहरे के किसी नर्व पर भी प्रभाव डालता है।

चंदन का पेस्ट सिरदर्द का बहुत पुराना इलाज है। चंदन की लड़की को घिसकर पेस्ट बना लें और माथे पर लगाएं। तत्काल आराम मिलेगा। अदरक सर्दियों में कई बीमारियों का इलाज करता है और सिर दर्द भी इनमें शामिल है। अदरक का उपयोग दो तरह से किया जा सकता है। इसके सेवन करके और दूसरे पेस्ट बनाकर सिर पर लगाकर। इन्हीं दो तरीकों से पुदीने का उपयोग भी किया जाता है। पुदीने की पत्तियों को पीसकर उनका रस माथे पर लगाएं या पुदीने की चाय बनाकर पिएं। तुलसी सिरदर्द भगाने का पक्का इलाज है। तुलसी की कुछ पत्तियों को पानी में उबालें और छानकर पिएं। तुलसी को सामान्य तरीके से चबाने से भी सिरदर्द रफूचक्कर हो जाता है।

अगर आपको गर्मी के दिनों में सिरदर्द की परेशानी हो रही है, तो बर्फ के टुकड़ों को आइस बैग में भरकर अपने माथे, गर्दन और पीठ पर 10 से 15 मिनट के लिए रखें।अगर आपके पास आइस बैग नहीं है, तो बर्फ के टुकड़ों को किसी कपड़े में बांधकर, उसे दर्द वाली जगह पर थोड़ी-थोड़ी देर के लिए रखें।अगर आपको ठंड के दिनों में सिरदर्द हो रही है, तो आप पानी को गुनगुना करके हॉट वॉटर बैग में डालकर उससे सेंक लें।अगर हॉट वॉटर बैग नहीं है, तो तौलिये या फिर साफ़ कपड़े को गर्म पानी में भिगोकर उससे दर्द वाली जगह पर सेंक लें।सिरदर्द तब होता है जब आपके सिर की मांसपेशियां और रक्त वाहिकाएं संकुचित होने लगती हैं। ऐसे में सिकाई करने से मांसपेशियों और रक्त वाहिकाओं को आराम मिलने लगता है। इससे रक्त प्रवाह सामान्य होता है और सूजन कम होती है, जिससे दर्द कम होने लगता है। ठंडा सेंक माइग्रेन के सिरदर्द में ज़्यादा फायदेमंद साबित होता है।इसके अलावा कुछ सिरदर्द में गर्म सेंक की ज़रूरत होती है, जब गर्म सेंक लेते हैं, तो रक्त प्रवाह बढ़ जाता है और दर्द कम होने लगता है।

लौंग का तेल सिरदर्द में गुणकारी घरेलू उपाय है। इससे थोड़े देर के लिए ही सही, लेकिन सिरदर्द से राहत मिलती है। यह प्राकृतिक तौर से एंटी-इंफ्लेमेटरी व एंटीसेप्टिक तो है ही, साथ ही इसमें अन्य कई पोषक तत्व भी मौजूद हैं। यह न सिर्फ़ सिरदर्द का इलाज करता है, बल्कि तनाव की परेशानी को भी कम करता है।

ग्रीन-टी में सीमित मात्रा में मौजूद कैफीन मस्तिष्क में रक्त प्रवाह में सुधार करता है और इससे सिरदर्द में आराम मिलता है। इससे न सिर्फ सिरदर्द की परेशानी ठीक होती है, बल्कि वज़न भी संतुलित रहता है, लेकिन अत्याधिक कैफीन का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है, इसलिए इसका सीमित मात्रा में सेवन करें।